Tuesday, 12 July 2016

कांग्रेस और विशेषकर नेहरू के काले कारनामे (Congress Historic Scams and Nehru)

कांग्रेस और विशेषकर नेहरू के काले कारनामे का इतिहास इतना बड़ा है 
की लोग लिखते लिखते थक जायेंगे 
चन्द्र शेखर आजाद की मुखबिरी करने वाले जवाहरलाल नेहरू थे 
सो देश का वह महान व्यक्ति असमय अंग्रेज की गोली का शिकार हो गया। 
नेहरू उस हर व्यक्ति से खफा रहते थे जिसकी प्रसिद्धि होती थी 
जनता जिसको पसंद करती थी और जो नेहरू अनुसरण कर नेहरू गुणगान नहीं करता था।
सुभाष चन्द्र बोस को भारत निष्कासन हो जाये 
सो नेहरू और उनके मोह में ग्रस्त गांधी ने इस महान देशभक्त का भरपूर विरोध किया 
नेहरू की सुभाष विरोधी मानसिकता इस बात से अब जग जाहिर हो गयी की 
वे आजाद भारत में भी उनकी जासूसी करवाते थे 
क्यों 
कोई इस प्रश्न का उत्तर देगा ?
वे सुभाष बाबू से ईर्ष्या करते थे 
जैसे महिलाये कई बार करती है (माताये क्षमा करे )
पाकिस्तान का निर्माण
नेहरू की सत्ता भूख और गांधी के द्वारा उसका अँधा समर्थन 
उस पाप का फल है 
वरना आरएसएस को जब देश विभाजन की जब अंग्रेज योजना की जानकारी मिली थी 
तब पंजाब सिंध कश्मीर जम्मू बंगाल में काम का भीषण विस्तार किया था 
बंगाल में अपेक्षित विस्तार नहीं हुआ था 
परन्तु पश्चिमी भाग में जबरदस्त विस्तार हो गया था 
गांव गांव शाखा फेल गयी थी 
उसी शक्ति के बल पर इस क्षेत्र का हिन्दू बचाया का सका था 
संघ से स्वयंसेवक का बड़ा बलिदान हुआ था 
राजस्थान के प्रान्त प्रचारक रहे और बाद में उत्तर पूर्व क्षेत्र के क्षेत्रीय प्रचारक बने माननीय देव जी मतलब ब्रम्हदेव जी कहते थे 
की विभाजन के बाद पंजाब में शाखाओ में संख्या एकदम घट गयी थी 
कारण कई सारे घरो से जवानो का बलिदान हो गया था 
सो माताये अपने छोटे बच्चो को शाखा भेजने से परहेज करती थी 
पंजाब का काम विभाजन से बहुत प्रभावित हुआ था 
वरना पूज्य गुरूजी ने 1942 से पंजाब सिंध आदि क्षेत्र में इतना परिश्रम करके जो नौजवान टीम खड़ी करी थी 
की यदि जैसी अंग्रेज योजना 1949 -1950 में विभाजन करने की थी 
वही चली होती तो आरएसएस विभाजन नहीं होने देता 
इतनी तैयारी चल रही थी 
कोई उस तैयारी की कल्पना कर सकता है 
कभी कोई बचा हुआ उस काल का सिंध पंजाब का कोई स्वयंसेवक मिल जाए और वह ठीक से बता दे तो बहुत जानकारी मिल जाएगी 
जब यह सारी भनक माउंट बेटन को मिली 
तो उसने एडविना का दांव खेलकर
नेहरू को उकसाया की य
दि आरएसएस सफल हो गया 
तो तुम प्रधान मंत्री नहीं बनोगे 
सरदार पटेल या राजेंद्र प्रसाद बन जायेगा 
वस्तुत ईसाई मिशनरी वेटिकन हिन्दू समाज के ज्ञान विज्ञान से भयभीत था 
उसे लगता था की कोई राष्ट्रीय मानसिकता का व्यक्ति प्रधान मंत्री बन गया तो भारत तीव्र गति से प्रगति करेगा 
और विश्व का शिरोमणि बन जायेगा 
उस समय उसे नेहरू सबसे योग्य ईसाई प्रचारक लगता था 
सो नेहरू की जिद्द से देश विभाजन की तारीख बहुत जल्दी तय की गयी। 
पाकिस्तान बनवाने में नेहरू की मुख्य भूमिका थी 
बनने के बाद भी नेहरू को भय था 
की सरदार पटेल आगे बढ़ जायेगा 
नेहरू जिन्ना पर शेख अब्दुल्ला पर विश्वास करने को तैय्यार थे 
परन्तु सरदार पटेल पर विश्वास नहीं करते थे 
मोहनदास करमचंद गांधी महात्मा था 
परन्तु अपनी आदतो से वृति से लाचार था 
वह शुरू से कामुक वृति का व्यक्ति था 
आप गांधी की लिखी जीवनी पढ़ेंगे तो आपको गांधी का कस्तूरबा के प्रति दैहिक व्यवहार ज्ञात हो जायेगा 
यह बात गांधी के कई पत्रो में बाद में उनके महिला व्यवहार से भी साबित होती है 
यह कामुकता गांधी के लिए आजीवन बोझ या दंड स्वरूप रही 
नेहरु ने इसका भरपूर लाभ उठाया 
वैसे गांधी भी प्रगतिशीलता की बीमारी से पीड़ित थे 
इसी कारण वे मांसाहार कर चुके थे 
शराब को भी पी चुके थे 
परन्तु गांधी की माँ बहुत धर्म निष्ठ थी
इसी कारन सो गांधी भी सामान्य श्रद्धालु बने रहे।
सो माउंट बेटन की सलाह से नेहरू ने तत्काल विभाजन की बात करी 
जिसमे वह सफल रहे कारण बेटन तो यही चाहता था 
उसके बाद उसी ने बेटन को गवर्नर जनरल बनवाया था 
जिस से वह अपनी मनमानी कर सके। 
कुछ नेहरू का उसके भाग्य ने साथ दिया 
वरना सरदार पटेल का जल्दी निधन नहीं होता 
गोडसे गांधी को गोली नहीं मारता 
और उस बहाने आरएसएस पर प्रतिबंध नहीं लगता 
गांधी हत्यारी होने का असत्य आरोप लगाने का बदनाम करने का अवसर नेहरू को नहीं मिलता 
सो यह नेहरू की देश द्रोहिता का परिणाम आज भी देश भुगत रहा है 
यह इस देश का दुर्भाग्य रहा की मन तन आचरण व्यवहार से हिंदू नहीं 
इस देश की सनातन परम्परा वेद दर्शन उपनिषद यहाँ तक रामचरितमानस का विरोधी 
इस देश का 18 साल तक प्रधान मंत्री बना रहा।

No comments:

Post a Comment